बुधवार, 23 जुलाई 2008

तन्हाई..

रात की तन्हाई बहुत कुछ कह जाती है,
दुनिया सो जाती है और यह तन्हाई रह जाती है
यादों का बड़ा गहरा याराना लगता है तन्हाई से
हमेशा तन्हाई में ही हमे घेरे चली आती है

फ़िर न आंखों में नींद और न सपने बसर करते है
उनकी जगह बस आंखों में आंसू ही बसेरा करते है....
चाहत हमे भी है खुशनुमा रातें बीतने की
पर हम इसी कागज़ और कलम का सहारा करते है
वो कहते है की सपने न देखा करो वो टूट जाते है
पर हम कहते है कम से कम वहां तो उनके दीदार हो जाते है
पर कमबख्त उनकी मसरूफियत का तो आलम ये है
की वोह सपनो में भी कम ही आते है

और हम जाग जाग के उनकी याद में रातें बिताते है................

4 टिप्‍पणियां:

  1. mere sari ke lagte ho..kya tum bhi mere jaise ho???? bahut khub likha hai aap ne ...shukriya....

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  2. रात की तन्हाई बहुत कुछ कह जाती है,
    दुनिया सो जाती है और यह तन्हाई रह जाती है

    bahut khub likha hai

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  3. रात की तन्हाई बहुत कुछ कह जाती है,
    दुनिया सो जाती है और यह तन्हाई रह जाती है

    -बहुत उम्दा...वाह!

    उत्तर देंहटाएं

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