रविवार, 20 जुलाई 2008

सपने............

सपनो की अपनी अजब कहानी
बचपन में बड़े प्यार से दिखाती थी नानी दादी
सपना वो जो कहने को एक छलावा था
पर कहीं कहीं वो हमारा था
सपनो में जो चाह वो पाना था
और जो खोया उसे खोने का डर जाना था
सपनो की डोर अपने हाथ तो थी
सपनो की कहानी अपने साथ तो थी
सपना एक आहात से टूट गया
एक पल में ही उससे नाता छुट गया
सपनो की दुनिया निराली थी
कभी खुशियो की हरियाली थी
तो कभी ग़मो की लाली थी
सपने हो तो जीने का मज़ा हो
सपना क्या है? ज़रा सोचो तो-
मुट्ठी से फिसलती रेत, या विचारो की बहती नदी-
जिंदगी को कभी सपनो में जिया करते थे
तो कभी मेहनत से सपनो का सिया करते थे
पर आज कल सपनो की भी बोली लगती है
सपनो की भी अपनी मंदी सजती है
पर जीने के लिए सपना ज़रूरी है
एक प्यारे से सपने के बिना जिंदगी अधूरी है
सोने और मौत का अन्तर भी यही
और मेरी और आपकी जिंदगी का भी अन्तर यही .......

2 टिप्‍पणियां:

  1. पर जीने के लिए सपना ज़रूरी है
    एक प्यारे से सपने के बिना जिंदगी अधूरी है
    सोने और मौत का अन्तर भी यही
    और मेरी और आपकी जिंदगी का भी अन्तर

    बहुत बढिया!

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