शनिवार, 19 जुलाई 2008

यूँ रह रह कर मुझे याद आते क्यूँ हो अब? हाल ऐ दिल!

कहकर तो गए थे के लौटकर न आओगे,
फिर ख़्वाब में आकर सताते क्यूँ हो अब?
जाना था तो हमेशा के लिए चले जाते ज़िन्दगी से,
यूँ रह रह कर मुझे याद आते क्यूँ हो अब?

वो जो लम्हा था जिसमें आखिरी बार मिले थे हम,
उन्ही लम्हों में अभी तक अटकी है ज़िन्दगी,
करता हूँ कोशिश के भूल जाऊं उन्हें मैं,
तुम रोज़ उन लम्हों को याद दिलाते क्यूँ हो अब?


करता तो है मुहब्बत हर कोई जहाँ में,
होता नही शरीक ज़िन्दगी में हमेशा वो,
तुम जो हमेशा करते थे मुहब्बत न करने की बातें,
रोज़ आ आकर ख़्वाबों में प्यार जताते क्यूँ हो अब?

हर रोज़ सुबह उठकर सोचता हूँ यही मैं,
नही करूँगा तुम्हे याद कभी ग़लती से भी अब,
माना के है इंसान गलतियों का पुतला यहाँ,
मुझसे ये ग़लती दोहरवाते क्यूँ हो अब?

जाना था तो हमेशा के लिए चले जाते ज़िन्दगी से,
यूँ रह रह कर मुझे याद आते क्यूँ हो अब?

1 टिप्पणी:

  1. कहकर तो गए थे के लौटकर न आओगे,
    फिर ख़्वाब में आकर सताते क्यूँ हो अब?
    जाना था तो हमेशा के लिए चले जाते ज़िन्दगी से,
    यूँ रह रह कर मुझे याद आते क्यूँ हो अब?



    --गज़ब, बहुत खूब!!!

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