शुक्रवार, 29 फ़रवरी 2008

दोस्तों मुझे मुबारकबाद दो- आज फिर मेरी चप्पलें चोरी हो गई!

लो भाई आप भी सोचोगे की ये किस चीज़ की मुबारकबाद मांग रहा है। अजी क्या कहूँ जब उपरवाला देता है या लेता है तो उसका धन्यवाद तो कर ही लेना चाहिए और वैसे भी ये भी तो एक तोप्गी ही तो होगी की एक ही साल में कईं चप्पलें चोरी होना वो भी एक ही इंसान की। अजी अब तो मैंने गिनना भी बंद कर दिया है। सोचा था मस्जिद में नमाज़ अदा कर आया जाए और चप्पलें पहन कर चले गए फिर क्या वही हमेशा की कहानी हमने तो होशियारी dikhayi की चप्पलें लेकर मस्जिद में रख दी , चोर भाई साहब हमसे भी ज़्यादा होशियार अन्दर से ही हाथ साफ कर गए। अजी हमतो खड़े थे की कब मस्जिद खाली हो और हम कोई टूटी फूटी चप्पल पहन कर घर चले जायें क्यूंकि इस बार नंगे पैर जाने का मन नही हो रहा था, वरना हमेशा की तरह इस बार भी मुहल्ले वालों को हंसने का बहाना मिल जाता। पर भला हो मस्जिद के मु अज्ज़म साहब का जो मिल गए और उन्होंने हमें इजाज़त दे दी कि सामने जो २ पट्टी की चप्पलें पड़ी हैं उन्हें ही पहन कर चले जाईये सो हमने भी देर नही की और मौके का फयेदा ही उठाने में भाल्यी समझी और फौरन मु अज्ज़म साहब की दी हुई चप्पलें लीं और घर का रास्ता पकड़ा। वैसे मजे की बात ये भी है कि शायद आज अपनी नीयत ही चप्पलें चोरी करवाने की थी क्यूंकि मस्जिद में दाखिल होने के बाद हम सोच ही रहे थे की आज अगर चप्पलें चोरी हो गई तो इसी बात पर लिखेंगे। हमें क्या पता था कि ख़ुदा ने यही मौका दिया है दुआ को कबूल करवाने का। वरना कुछ और ही न सोच लेते। वैसे अब ये बात नही रही किसी न किसी की कभी न कभी मन्दिर में या मस्जिद में चप्पलें चोरी हो ही जाती हैं। वो तो शुक्र हो कि अब हमने कमाना शुरू कर दिया है वरना घरवालों से ताना मिलता कि महनत से कमाओ और इनको चप्पलें लाकर दे दो.

3 टिप्‍पणियां:

  1. चलिए इस तरह ही सही....चप्‍पलों ने लिखने का बहाना तो दिया।

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  2. मेरे एक मित्र ने चप्पलें बचाने का बहुत बढ़िया तरीका बताया था । दोनों चप्पल साथ साथ ना रखें कभी भी । एक चप्पल उत्तर में रखें तो दूसरी दक्षिण में !
    घुघूती बासूती

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  3. घुघुती जी ने जो उपाय बताया है वो कालेज टाइम में कई बार आजमा चुकें हैं। अगली बार आप भी आजमा कर देखियेगा।

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