शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2008

क्या आप को लव अत १स्त् साईट पे यकीन है?




अजी मुझे भी कहाँ था?
पर में आज भी उस दिन को याद करता हूँ जब मैंने मुगल ऐ आज़म देखि थी और उसमें मैंने मधुबालाजी का पहला सीन देखा था घूँघट उठाते हुए.मेरी तो साँसे थम से गयीं थी,वो भी रंगीन में.अजी कहना ही क्या? ऐसा नही है मैंने अपनी ज़िंदगी में हसीन महिलाएं नही देखीं पर इतनी ! लिल्लाह, मशाल्लाह,सुभानाल्लाह। सबकुछ एक साथ ही निकल गया। उस दिन मुझे शर्म भी बड़ी आई अपनी हालत पे की मुझे ये क्या हो गया है.?मैंने ऐसा कैसे सोच सकता हूँ? मैंने बाद में जिस किसीको भी अपने दिल का हाल बताया सा ही ने मेरी मजाक उडाई क्या मेरी गलती ये थी की मैंने सच्चाई बता दी?शायद यही थी। पर समझ में आ गया की लव अट फस्ट साईट भी कुछ होता है।
मधुबालाजी सारे देश की तरह मेरा नाम भी अपने चाहने वालों में डाल लीजियेगा क्यूंकि में सिर्फ़ आपको पसंद ही नही करता बहुत पसंद करता हूँ.
और कल क्यूंकि आपका जन्मदिन है तो याद बड़ी आई.

2 टिप्‍पणियां:

  1. यकीन का तो बाद में बताएंगे पर पहले

    लव अत १स्त्
    इसका मतलब समझाइये ...

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  2. sujataji kya karoon..fount gadbad kar gaya..ise aap english mein hi padh lijiye..love at 1st site.
    ummeed hai ab aapko pata chal gaya hoga.

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