सोमवार, 16 जून 2008

के पड़ रही हैं बारिश की बूँदें और तुम याद आ रहे हो! : हाल ऐ दिल

फिर चल रही हैं महकती ठंडी हवायें ,
के पड़ रही हैं बारिश की बूँदें,
और मुझे, तुम याद रहे हो

हो रहा है दिल मोर की तरह बैचैन,
उठ रही हैं दिल में हसरतें,
और मुझे, तुम याद रहे हो

कर रहा हूँ महसूस खुशबुओं को मिटटी की,
बस रही हैं मेरी साँसों में सीरत इनकी,
और मुझे, तुम याद रहे हो

सामने देख रहा हूँ किसी को लड़ते हुए,
के हो रही हैं शिकायतें बारिश में निकलने पर,
और मुझे, तुम याद रहे हो

के बैठा हुआ हूँ हाथ में चाए का कप लिए,
सामने से तुम्हारे मनपसंद पकोडों की खुशबू रही है,
और मुझे, तुम याद रहे हो

जब भी चल रही है ठंडी हवा,
देख रहा हूँ उड़ती हुई जुल्फें किसीकी,
और मुझे, तुम याद रहे हो

जब कम हो रही हैं बूँदें, सामने से कोई कह रहा है,
मौका अच्छा हैं अब निकलने दो,
और मुझे, तुम याद रहे हो


2 टिप्‍पणियां:

  1. जब भी चल रही है ठंडी हवा,
    देख रहा हूँ उड़ती हुई जुल्फें किसीकी,
    और मुझे, तुम याद आ रहे हो।

    -बहुत बढ़िया.

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