सोमवार, 9 जून 2008

बारिश से मेरी गुज़ारिश! कुछ मेरी डायरी से

बारिश का इंतज़ार!

के आती नही है तो तेरे आने का इंतज़ार रहता है!
कभी फूल पूछते हैं, कभी पत्ता बेक़रार होता है!!

पड़ती है जब पहली बूँद बारिश की!
उस खुशबू का एहसास बेमिसाल होता है!!

ये आती है तो आ जाती है खुशी सबके चेहरे पर!
और इसके जाने से मन उदास होता है!!

बड़ी दुआओं से मिलती है रहम की बारिश!
वरना बारिश में भी तबाही का सामान होता है!!

मेरी दुआ है के जब बरसे तो संभल कर बरसना,
क्यूंकि हर झोपडे में टपकने के लिए एक सुराख होता है!!
के सोता है जहाँ पर एक बच्चा ,
जिसको तेरे गुस्से से डर लगता है!!
बूँद डालना तो यूं डालना उसके चहरे पर,
जैसे माँ का हल्का सा एहसास होता है!!

6 टिप्‍पणियां:

  1. बूँद डालना तो यूं डालना उसके चेहरा पर,
    जैसे माँ का हल्का सा एहसास होता है!!

    wah wah! kitni pyari baat kah di!bahut khuub bhaav hain..

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  2. अच्छा मल्हार गीत बन पडा है, बधाई।

    ***राजीव रंजन प्रसाद
    www.rajeevnhpc.blogspot.com

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  3. बूँद को माँ के मुलायम अहसास के साथ जोड़ने की बात बहुत मर्मस्पर्शी है.

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  4. मेरी दुआ है के जब बरसे तो संभल कर बरसना,
    क्यूंकि हर झोपडे में टपकने के लिए एक सुराख होता है!

    अच्छा प्रयास, लिखती रहें...

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  5. again a nice one...society se jud k likhte hai...gud...wese barish ki bundon ka shumar hon atha aapke collection me...bt barish ka pehlon dekh k bhi acha laga :D

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