मंगलवार, 8 अप्रैल 2008

कुछ सवाल: कुछ मेरी डायरी से!

जब तलक इस जान में रूह रहेगी,
दिल में किसी बात की कमी सी रहेगी,

कर तो सकते थे मोहब्बत में बहुत कुछ,
पर कर न सके कुछ भी इसकी तकलीफ रहेगी।

इनसां जितना भी चाहे , ख़ुदा से लड़ नही सकता,
ये कैसा इन्साफ है ख़ुदा का, इस सवाल को पूछने ज़रूरत रहेगी।

मकसद ज़िंदगी का है क्या ख़ुदा जाने,
इस बात को जानने की तफ्तीश चलती ही रहेगी।

हर वक्त वो जो मुझे नज़र आता है क्यों,
जब उससे मेरा कोई नाता ही नही है,
करता है दिल उसे याद क्यों
जब वो मेरा नही है।

2 टिप्‍पणियां:

  1. कर तो सकते थे मोहब्बत में बहुत कुछ,
    पर कर न सके कुछ भी इसकी तकलीफ रहेगी।
    नदीम मियां बहुत गहरे भाव हे आप के शेरो मे धन्यवाद

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