बुधवार, 27 अगस्त 2008

मेरा साया था वो तो! हाल ऐ दिल!

मसला था, न कोई हल था, मेरा यार था वो तो,
था जिसपे गुमां भी मुझे, दिलदार था वो तो।

रहता था मेरे दिल के क़रीब, धड़कन सा था कोई,
मेरे लिए मेरे हर सवाल का जवाब था वो तो।

करता था दिल पे राज, कोई राज़ था शायद,
मेरा सनम मेरे लिए हर बात था वो तो।

जाने क्या हुआ के चल दिया मुझको छोड़कर,
अब हूँ साये बिना, मेरा साया था वो तो।

3 टिप्‍पणियां:

  1. जाने क्या हुआ के चल दिया मुझको छोड़कर,
    अब हूँ साये बिना, मेरा साया था वो तो।
    बहुत अच्छा ।

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  2. मसला था, न कोई हल था, मेरा यार था वो तो,
    था जिसपे गुमां भी मुझे, दिलदार था वो तो।

    --बहुत बढिया.लिखते रहें.

    उत्तर देंहटाएं

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