शनिवार, 10 मई 2008

माँ-बस तेरे लिए. : माँ तुझे सलाम!

ऐ माँ मैं तेरे आँचल में पला बढ़ा,
न जाने किस रास्ते पर खोने चला।
फिर ज़रूरत है तेरी हथेली की मालिश की,
के बहुत दिन हो गए चैन से सोये हुए।

खो गया हूँ मैं
फिर से जाने किन राहों में,
भटक सा गया हूँ
मैं अकेले चलते हुए।

हर एक लम्हा
मैं तेरा शुक्र गुज़ार हूँ माँ,
जानता हूँ के मेरी तकलीफ में
कईं शब गुज़री तुझे न नींद लिए,

मुश्किलात हैं कड़ी राहों में मेरी,
है मुझे तेरी ही दुआओं का सहारा ऐ माँ,
मुझे फिर गले से लगाले,
मुझे भी अब इस बेचैनी से चैन मिले।

पता नही मैंने क्या लिखा जो भी तुक बना मैंने लिख डाला। सुना है, कल माँ का दिन है।

मेरी माँ को मेरा सलाम।
सबकी माँओं को भी सलाम।

3 टिप्‍पणियां:

  1. मेरी माँ तुने मुझे ज़िन्दगी दी,
    और मैं तुझसे ही दूर भागता रहा,
    एक तेरा ही प्यार था मेरी माँ,
    जो मुझे हर मुश्किल से उबारता रहा.

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  2. मेरा सलाम भी!!! बहुत्स खूब मित्र.

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