रविवार, 26 अक्तूबर 2008

ब्लॉगर तू उतावला क्यूँ है?

कई दिनों से कुछ लिख नही रहा था। बस ये देख रहा था के हर बात पे शोर मचने वाला हमारा ब्लॉग जगत कुछ चुप चुप सा है। बात बात पे आतंकवाद की बात करने वाले और कठोर दंड और कानून की बात करने वाले अचानक चुप कैसे हो गए। शायद वो ये सोच रहे थे के कैसे बचाव किया जाए। और आज कुछ पोस्ट्स में मुझे ये सब पढने को मिला भी। हँसी भी आई और तरस भी आया के अभी पहले जाँच और पूछताछ के नतीजे तो आने देते उसके बाद ही बचाव करते। होगा कुछ नही ये बात मुझे भी पता है। न किसीको सज़ा होगी और न बात आगे बढेगी। जहाँ सामने क़त्ल करने वालो और कैमरा के सामने इस बात का इक़रार करने वाले के कैसे एक महिला जो माँ बनने वाली है उसका पेट काटा गया, को कोई सज़ा नही हुई और न ही इसका आगे ज़िक्र भी हुआ।

मैं केवल इतना ही कहना चाहूँगा के आप लोग सब्र से बैठ और अपने कानून पर भरोसा रखें कुछ नही होगा।

5 टिप्‍पणियां:

  1. नदीम भाई ठीक कह रहे हैं कानून पर भरोसा रखें कुछ न कुछ जरूर होगा

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  2. नदीम भाई कोई भी चुप नही बेठा है न ही कोई बचाव करने के रास्ते तलाश रहा है जिन्होंने कुछ ग़लत किया उन्हें सजा जरुर मिलेगी | सब्र रखे कानून पर भरोसा भी रखे,यह ना सोचे की कुछ होने वाला नही,यदि मामले में कुछ हुवा तो कानून अपना काम जरुर करेगा ये भारत है यहाँ पूर्व प्रधान मंत्री तक कानून काम सामना करना पड़ा है वे भी अपनी फाइल गायब नही करवा सके |

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  3. शेखावत जी बिल्कुल ठीक कह रहे हैं. देखते चलिए.

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  4. हमें तो विश्वास है कि यह "कांग्रेसी खेल" न्यायालय में बेनकाब होकर रहेगा…

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  5. दिपावली की शूभकामनाऎं!!


    शूभ दिपावली!!


    - कुन्नू सिंह

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