
हम भी कभी ख़्वाबों पे यकीं किया करते थे ,
रात रात भर नए ताने बुना करते थे,
!
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अब ज़िन्दगी ने हकीक़त से रूबरू कराया है।
कोतुहल मेरे दिमाग में उठता हुआ एक छोटा सा तूफ़ान है.जिसमें में अपने दिल में उठा रही बातों को लिख छोड़ता हूँ.और जैसा की नाम से पता चलता है कोतुहल.

हम भी कभी ख़्वाबों पे यकीं किया करते थे ,
रात रात भर नए ताने बुना करते थे,
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अब ज़िन्दगी ने हकीक़त से रूबरू कराया है।
बेहतरीन भाव!
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