
याद जब भी आती है, तो आँखें नाम हो ही जाती हैं,
तेरी बातों की यादों में, ये ग़ोते लगाती हैं ,
!
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अगर ये फासला ना होता, तो क्या ये मज़ा होता ?
कोतुहल मेरे दिमाग में उठता हुआ एक छोटा सा तूफ़ान है.जिसमें में अपने दिल में उठा रही बातों को लिख छोड़ता हूँ.और जैसा की नाम से पता चलता है कोतुहल.

याद जब भी आती है, तो आँखें नाम हो ही जाती हैं,
तेरी बातों की यादों में, ये ग़ोते लगाती हैं ,
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अगर ये फासला ना होता, तो क्या ये मज़ा होता ?
बहुत सुन्दर रचना ..
ReplyDeleteबेहतरीन प्रयास!!
ReplyDeleteबहुत खूब ...
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