गुरुवार, 6 मई 2010

कम्बख्त बेवफा ना होता, तो मेरे दिल में ही रह रहा होता। हाल ऐ दिल!


बात करता है ज़ालिम तो,
ज़ुबां से दिल में उतर जाता है ,
कम्बख्त बेवफा ना होता,
तो मेरे दिल में ही रह रहा होता ।

3 टिप्‍पणियां:

  1. बात करता है ज़ालिम तो,
    ज़ुबां से दिल में उतर जाता है ,
    कम्बख्त बेवफा ना होता,
    तो मेरे दिल में ही रह रहा होता ।


    मन को छू लेने वाली रचना...

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  2. बडी गहरी भावनाएं हैं


    शुभकामनाएं।।

    उत्तर देंहटाएं

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