
बात करता है ज़ालिम तो,
ज़ुबां से दिल में उतर जाता है ,
कम्बख्त बेवफा ना होता,
तो मेरे दिल में ही रह रहा होता ।
कोतुहल मेरे दिमाग में उठता हुआ एक छोटा सा तूफ़ान है.जिसमें में अपने दिल में उठा रही बातों को लिख छोड़ता हूँ.और जैसा की नाम से पता चलता है कोतुहल.

बात करता है ज़ालिम तो,
ReplyDeleteज़ुबां से दिल में उतर जाता है ,
कम्बख्त बेवफा ना होता,
तो मेरे दिल में ही रह रहा होता ।
मन को छू लेने वाली रचना...
वाह वाह |
ReplyDeleteबडी गहरी भावनाएं हैं
ReplyDeleteशुभकामनाएं।।