
न है अब दिल को दुखाने की वजह,
न कोई रोने का सबब ही बाकी है,
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मैं तेरी यादों से कितना दूर चला आया हूँ।
कोतुहल मेरे दिमाग में उठता हुआ एक छोटा सा तूफ़ान है.जिसमें में अपने दिल में उठा रही बातों को लिख छोड़ता हूँ.और जैसा की नाम से पता चलता है कोतुहल.

...बहुत सुन्दर !!
ReplyDeleteवाह! कमाल की पंक्तियाँ है!
ReplyDeleteकमाल की पंक्तियाँ...
ReplyDeleteअच्छे भाव वाली रचना ।
ReplyDeleteअतिसुन्दर..वाह...
ReplyDeleteनीरज