कोतुहल search

Thursday, May 13, 2010

मैं तेरी यादों से कितना दूर चला आया हूँ। त्रिवेणी की कोशिश!


न है अब दिल को दुखाने की वजह,
न कोई रोने का सबब ही बाकी है,
!
!
!
मैं तेरी यादों से कितना दूर चला आया हूँ।

5 comments:

  1. ...बहुत सुन्दर !!

    ReplyDelete
  2. वाह! कमाल की पंक्तियाँ है!

    ReplyDelete
  3. कमाल की पंक्तियाँ...

    ReplyDelete
  4. अच्छे भाव वाली रचना ।

    ReplyDelete
  5. अतिसुन्दर..वाह...
    नीरज

    ReplyDelete

Related Posts with Thumbnails