
थी बड़े सुकून की जगह वो,
जिसमे था कोई बुत, कोई इबादत खाना,
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अब तो लगता है डर मुझे उस कोने में जाते हुए भी..
कोतुहल मेरे दिमाग में उठता हुआ एक छोटा सा तूफ़ान है.जिसमें में अपने दिल में उठा रही बातों को लिख छोड़ता हूँ.और जैसा की नाम से पता चलता है कोतुहल.

भाव अच्छे है आपके। क्या मीटर होता है त्रिवेणी लिखने का बता सकते हैं आप? शायद कुछ मात्राओं से शब्दों का बेजोड़ संगम है त्रिवेणी। खास कुछ मुझे पता नही हो सके तो बताईये। मै भी लिखना चाहूँगी।
ReplyDeleteNK Ji, kaash mujhe is mui triveni ka kuchh gyaan hota to main yahan koshish na likhta haan...pata chalte hi bata dunga.. :)
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