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Sunday, September 26, 2010

जिसमे था कोई बुत, कोई इबादत खाना! त्रिवेणी की कोशिश!


थी बड़े सुकून की जगह वो,
जिसमे था कोई बुत, कोई इबादत खाना,
!
!
!
अब तो लगता है डर मुझे उस कोने में जाते हुए भी..

2 comments:

  1. भाव अच्छे है आपके। क्या मीटर होता है त्रिवेणी लिखने का बता सकते हैं आप? शायद कुछ मात्राओं से शब्दों का बेजोड़ संगम है त्रिवेणी। खास कुछ मुझे पता नही हो सके तो बताईये। मै भी लिखना चाहूँगी।

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  2. NK Ji, kaash mujhe is mui triveni ka kuchh gyaan hota to main yahan koshish na likhta haan...pata chalte hi bata dunga.. :)

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