बुधवार, 29 सितंबर 2010

ख़ुद अपने ही घर में झाँकना बाकी रहा मेरा! हाल ऐ दिल!


भटकता रहा सुकून की ख़ातिर सब जगह लेकिन,
ख़ुद
अपने ही घर में झाँकना बाकी रहा मेरा ......

2 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर शब्दों के साथ.... बहुत सुंदर अभिव्यक्ति....

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  2. Bahot Khub... :)
    Go thr my blog also...
    http://www.niceshayari-poems.blogspot.com/

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