है उदास वो आज फिर,
बैठा है तन्हा,
!
!
!
शायद अब क़द्र उसको यारों की होगी...
Tuesday, September 28, 2010
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कोतुहल मेरे दिमाग में उठता हुआ एक छोटा सा तूफ़ान है.जिसमें में अपने दिल में उठा रही बातों को लिख छोड़ता हूँ.और जैसा की नाम से पता चलता है कोतुहल.
ग़ज़ब की कविता ... कोई बार सोचता हूँ इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है .
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