
ख़ुद-ब-ख़ुद बोल जाती हैं आँखें उनकी,
जो वो नहीं कहते, कह जाती हैं आँखें उनकी,
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उनको तो राज़ छुपाना भी नहीं आता.....
कोतुहल मेरे दिमाग में उठता हुआ एक छोटा सा तूफ़ान है.जिसमें में अपने दिल में उठा रही बातों को लिख छोड़ता हूँ.और जैसा की नाम से पता चलता है कोतुहल.

ख़ुद-ब-ख़ुद बोल जाती हैं आँखें उनकी,
जो वो नहीं कहते, कह जाती हैं आँखें उनकी,
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उनको तो राज़ छुपाना भी नहीं आता.....
sirf koshish nhi bahut achhi triveni.
ReplyDeleteआँखें हैं ना ... बनावटी होना नही जानती ... अच्छा लिखा ...
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