रविवार, 31 जनवरी 2010

तू कहीं शर्मिंदा ना हो जाये। हाल ऐ दिल!



यूँ सोचता हूँ के कभी मिलूँ,
तुझसे अचानक कहीं,

खौफ़ बस इतना है,
के तू कहीं शर्मिंदा ना हो जाये।

2 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है ...... क्या किया है ऐसा जो वो शर्मिंदा होंगे .......

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  2. wah...

    apani inn ankhoon main daba rakha hai,
    dard ka dariya kahin,

    khof bas itna hai,
    kahin teri hasti na bhah jaye!

    उत्तर देंहटाएं

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