सोमवार, 12 अप्रैल 2010

कमी शायद मुझी में थी! दो लाइन!


मेरे दिल में रहकर भी, वो बेगाना ही रहा,
कमी शायद मुझी में थी, या जगह थोड़ी कम रही होगी....

5 टिप्‍पणियां:

  1. "कमी शायद मुझी में थी, या जगह थोड़ी कम रही होगी...."

    mast hai ji...

    kunwar ji,

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  2. बहुत खूब ...
    दो लाइनों में गहरा सार ....

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  3. bahut khub
    हुत खूब ...@@@@@@@@@

    http://kavyawani.blogspot.com/
    shekhar kumawat

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  4. अच्छी लगी आपकी कवितायें - सुंदर, सटीक और सधी हुई।

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