रविवार, 5 जुलाई 2009

फलसफ़ा जिंदगी का, तमाम हो चुका अपना। हाल ऐ दिल


जिंदगी की किताब के कुछ खाली पन्ने,
आज भी कुछ अल्फ़ाज़ों के लिखे जाने के इंतज़ार में हैं।
नादान है ये अभी नही जानते,
के फलसफ़ा जिंदगी का, तमाम हो चुका अपना।

1 टिप्पणी:

  1. वाह...
    ज़िंदगी बाकी है, फलसफ़ा तमाम हुआ तो क्या?

    शायद इसीलिए खाली पन्ने आपके इंतज़ार में हैं...

    और चलिए, हम भी इंतज़ार में हैं...शेर के लिए धन्यवाद...

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