
लौटा है कोई बड़ी मुद्दत के बाद यहाँ,
दिल में कईं अरमान, कईं डर हैं उसके,
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भूल गया, खंडहर शिक़वा नहीं करते.
कोतुहल मेरे दिमाग में उठता हुआ एक छोटा सा तूफ़ान है.जिसमें में अपने दिल में उठा रही बातों को लिख छोड़ता हूँ.और जैसा की नाम से पता चलता है कोतुहल.
Ye sach hai khandhar shiva nahi karate .... Par unke halaat sab bayaan kar dete hain ...
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